तुम मिल सको तो मिल लेना, कुछ कह सको तो कह लेना... मैं जी नहीं पाया जुदा होकर तुमसे, तुम जी सको तो जी लेना...

लहरों का शोर नहीं सागर का 'शान्त' सुनो , जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो एकान्त चुनो ..!!

सोच का अंधेरा रात के अंधेरे से, ज़्यादा खतरनाक होता है.....

चिंता से चतुराई घटे, दु:ख से घटे शरीर। पाप से लक्ष्‍मी घटे, कह गये दास कबीर।।

ये उदास रात उजड़ी हुई नींद और चीखते हुए हम, लगते तो ज़िन्दा हैं दोस्त लेकिन ख़त्म हो गये हम..!!

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