बाबा पुराने दौर की कुछ बात बताइए , ऐसा सुना है होती थी क़ीमत ज़बान की ।।

कहने को सभी अपने है लेकिन सिर्फ़ कहने को …..!!!

बच्चे कि सारी जरूरतें पूरी कर उसे हर विपदा से बचाती है, मां ही है जो बच्चे को गोद में रख अपनी जिम्मेदारी निभाती है!

अहमियत यहां हैसियत को मिलती है और हम जज़्बात लिए घूम रहे हैं!

जज्बात में बहुत ताकत है , निर्माण की भी और विध्वंस की भी।

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