तुम नहीं.. तुम्हारा बदला हुआ बर्ताव चुभता है..!!

ना देवरानी जेठानी कि कोई लड़ाई ना कोई गृह कलेश था, एक ही चूल्हे में बनता था खाना, ऐसा भारतीय परिवेश था..!!

बहुत संभाल के हमनें रखे थे पाँव मगर , जहा थे जख़्म वही चोट बार - बार लगी ।।

कभी समाज कि गंदी नियत, कभी पारिवारिक यातनाएं, मुख पर नकली मुस्कान रखकर अकेले में आंसू बहाएं..!!

अच्छे इंसानों में एक बुराई होती है, कि वो सबको अच्छा समझ लेते हैं....

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