ना होने का एहसास सबको है.. मौजूदगी की कदर किसी को नहीं..!!

बुद्धि अगर स्वार्थ से मुक्त हो, तो हमे उसकी प्रभुता मानने में कोई आपत्ति नहीं।

चरण कमल राधा रानी के, जहाँ जहाँ पड़ जाएं, मिट्टी के कण भी झूम झूम, बस राधे राधे गाएं !!

ना दशहरा ना होली ना दिवाली होता हैं, बेरोज़गारो का त्योहार नौकरी होता हैं...

खुद की पहचान बनाने मे जो मजा हैं, वह किसी की परछाई बननें मे कहा हैं यारों...

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