दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए

ना वो खानदान रहे ना वो दरियादिल अब तो लोग किसी को भीख भी देते हैं तो चन्द सिक्को के बदले लाखो की दुवा चाहते हैं

कर्म ध्यान से कीजिए क्योंकि ना किसी की दुआ खाली जाती है और ना बदुआ !

युद्ध में विजय हो या पराजय दोनों का परिणाम मातम ही होता है |

अपने को साधारण आदमी मानना भी एक ताक़त है। ऐसा आदमी असाधारणता के कोई फालतू सपने नहीं देखता, और निराश नहीं होता, टूटता नहीं।

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