हम भूख के पले बच्चे हैं एक दिन आएगा हम सबकुछ खाएंगे अब जब घर से निकले है तो इतिहास लिखकर ही जाएंगे। ज़ाकिर खान

"CRUSH" तो दूर की बात है, मुझ पर तो किसी को तरस भी नहीं आता..,!!

रात इकाई नींद दहाई ख़्वाब सैकड़ा दर्द हज़ार!

अश्कों से .. धोखों से .. जख्मों से मिलता है .. सबक जिंदगी का , कहाँ दो - चार किताबों से मिलता है...

जहां बदलना जरूरी हो जाता है, वहां बदलना सीखिए..!!

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