“ये फ़र्ज़ रहे ध्यान में,लिखा है संविधान में,अगर कोई भी बात,तेरा मन गई कचोट कर,तू वोट कर,ये प्रश्न तेरे बल का है,सवाल तेरे कल का है,समय ये फ़ैसले का फिर से,आ गया है लौट कर,तू वोट कर”

ज़िंदगी को जंगल केउस पेड़ की तरह बनाओ,जो हर परिस्थिति मेंमस्ती से झूमता रहे।

ज़िन्दगी की तलाश में हम मौत के कितने पास आ गए

मेरी तलब के तकाज़े पे थोड़ा गौर तो करमैं तेरे पास आया हूं खुदा के होते हुए

मेरे मसले अलग है दुनियां से मैं सबसे ज्यादा अपने में ही उलझी हूं

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