रिश्तों को निभाने में भावनाएं होनी चाहिए, विवशता नहीं..

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं। हरिओम पंवार

प्रेम की भाषा प्रत्येक जीव समझता है.. आत्मा किसी भी रूप में हो,,..!!

मंजिलों की परवाह ना कीजिए, जिंदगी सफर है आप चाय पीजिए...

वक्त तराजू है जनाब ••• वो जो बुरे वक्त में आपनो का वजन बता देता है ....!!

Translate »