अंत तक का नहीं.. अनंत तक का सफ़र है प्रेम..!!

समझने वाले ख़ामोशी भी समझ लेते हैं और न समझने वाले जज़्बात का भी मज़ाक बना देते हैं।

"किडनी" से काम चले तो बता देना, अब किसी को "दिल" देना अपने बस की बात नहीं..!!

बिछड़ना नहीं, सम्मान ख़त्म हो जाना प्रेम का अंत हैं...

दुश्मन के शोर से ज़्यादा.. दोस्त की खामोशी तकलीफ देती है..

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