इंतज़ार उसके करते थक गई मेरी अंखियां , ये दिल तू ही बता इस चांद का क्या करूं मैं...

तेरे राहों में काँटे बहुत है। तेरी निगाहों के प्यासे बहुत है।

बहन बाक़ी तो सब ठीक है पर जब हम चन्द्रमा पर रहने लगेंगे... तब करवा चौथ का व्रत किस को देख कर खोलेंगे...??

भूखे पेट तेज धूप में तपता बहुत है गरीब का खून है साहेब ये सस्ता बहुत है

इंसानियत दिल में होती है हैसियत में नहीं ऊपर वाला कर्म देखता है वसीयत नहीं!

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