हंसने की आदत डाली है, खुशी का कुछ एहसास नहीं, आसू भी अक्सर डुलते है पर दुःख भी कोई खास नहीं, नकाबों मैं वक्त गुजरे अपना, गहरे अपने जज़्बात नहीं...!!

मिलती नही है सादगी, मुुश्किल बड़ा ये काम, मिल जाये जब ये सादगी, मिलते नही है दाम

हो गई है पीर पर्वत-सी अब पिघलनी चाहिए। हर सूरत में अब इस हिमालय से कोई नई गंगा निकलनी चाहिए।

जीवन एक ऐसा रंगमंच है, जहां किरदार को खुद नहीं पता होता, कि अगला दृश्य क्या होगा...

वक़्त का करम है हम पर , जो तुमसे वक़्त रहते दूर हो गए!!

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