खैर अच्छा तो कुछ नहीं, पर जो है सही है..

शत-शत दीप इकट्ठे होंगे अपनी-अपनी चमक लिए, अपने-अपने त्याग, तपस्या, श्रम, संयम की दमक लिए।

चूल्हे में जल रही आग से बड़ी नहीं कोई रौशनी

इन्तज़ार मत करो जो कहना है कह डालो क्योंकि हो सकता है फिर कहने का कोई अर्थ न रह जाय...!!

बना कर मिट्टी के दिए जरा सी आस पाली है , मेरी मेहनत भी ख़रीदो लोगो मेरे घर भी दिवाली है ...

Translate »