मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे

हसरत थी किसी के दिल में ज़िंदा रहने की अफ़सोस हम ख़ुद के अंदर ही मर गए…

बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा।

एक नींद जो पूरी नहीं हुई.. एक ख्वाब मुझे सोने नहीं देता..!!

रात चाहे कितनी भी काली क्यूं न हो मन में रोशनी का दिया जलाया जा सकता है उम्मीद के दीपों से सजाकर घर अपना आमवस को पूर्णमासी बनाया जा सकता है..!

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