चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं, रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं.

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं !

बुद्धि और परिश्रम के शिवाय दुनियाँ में कोई चमत्कार नही है तरक़्क़ी और सुख- शांति का ?

क्या थी मेरी गलती जो मुझे अकेला छोड़ गयी तू बिना सोचे मुझे क्यों इतना तनहा छोड़ गयी तू .!!

तेरे हुस्न को परदे की क्या जरूरत,,, कौन होश मे रहता है तुझे देखने के बाद,,,

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