हसरतें दफन हैं मुझमे ख़ुद का ख़ुद मज़ार हूं मैं!!

खता मत गिन इश्क़ में,किसने क्या गुनाह किया इश्क़ एक नशा था, तूने भी किया और मैंने भी किया !!

तुम्हारा "तुम" कह कर रोज़ झगड़ना, तुम्हारा "आप" कह कर बिछड़ने से अच्छा था...!!

बिछड़ने वाले तुझे देख-देख सोचता हूँ तू फिर मिलेगा तो कितना बदल चुका होगा...

मनुष्य के आगे कुछ बड़ा नहीं, हारा वही जो लड़ा नहीं....

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