छोड़े थे तेरी खातिर कितने हसीन लोग उनमें से एक के बराबर भी नहीं हैं तू

सब्र जितना था कर लिया मैने, अब तुम ना मिलों वही बेहतर है...

पीड़ा, अवसादों से रिश्ता जोड़कर, नाता खुशियों से तोड़ा था, मोहब्बत में रूह को फना करके, मैंने अपनी जान निचोड़ा था..

आए हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर । एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बंधे जंजीर॥ कबीर

सहर से खुशियां मांगने चले थे मुझे फूलों से मोहब्बत हो गई.!

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