थोड़ी आँच बची रहने दो, थोड़ा धुआँ निकलने दो
कल देखोगी कई मुसाफ़िर इसी बहाने आएँगे
उनको क्या मालूम विरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आये तो यहाँ शंख-सीपियाँ उठाने आएँगे
रह—रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढ़ें तो...
पता नहीं क्यों सब बीवी से डरते हैँ
मैं तो किसी की बीवी से नहीं डरता
“हम मिलेंगे कब ?
उसने पूछा
एक साल और एक जंग के बाद,
मैंने बताया
जंग कब ख़त्म होगी ?
उसने पूछा
आरंभ से प्रारंभ तक
प्रारंभ से अंत तक
अंत से अनंत तक सब शिव हैं
मुँह पर सच बोलने
और गुस्सा करने वाले लोग
उन लोगों से लाख गुना बेहतर है
जो आपके सामने कुछ और है
पीठ पीछे कुछ और है !!