हम भी पेड़ की टहनी हुआ करते थे...छिले इतने गये के खंज़र बन गये...

पैसे की कीमत अपने बाप से जाकर पूछो जिसने सारी जिंदगी तुम्हारें लिए अपना सुख चैन छोड़ दिया

नौकरी मांगने पर लाठियां से पीटा जाएगा इंसाफ मांगने पर सड़क पर घसीटा जाएगा

तबाह होकर भी तबाह नही दिखती...ये इश्क़ है इसकी कोई दवा नही बिकती...

लोग ही गिन लेते हैं गुनाह मेरे... फरिश्तों अब तुम ये काम रहनें दो...

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