हर प्रशंसा करने वाला शुभचिंतक नहीं होता है.!

मजबूर नहीं करूँगा किसी को बात करने के लिए, जिसको जाना है वो चला जाये जो मेरा है वो ठहर जायेगा !!

पुरुष को एक मात्र केवल , प्रेम से छला जा सकता हैं।

किसी को छल कर ग़र तुम ख़ुश हो रहे हो, तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी नाकामयाबी है।

प्यार कितना क्षणिक है और भूलना कितना दीर्घ।

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