औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है

सहनशीलता, क्षमा, दया को तभी पूजता जग है बल का दर्प चमकता उसके पीछे जब जगमग है।

प्यास बुझने के बाद खाली बोतल भी बोझ लगने लगती है

ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ। अपना तन सीतल करै, औरन कौं सुख होइ॥

उम्र बढ़ती, प्यार बढ़ता, अरमां जवां और दुनिया हसीन हो जाती, तुम झरोखे से कुबूल कर लेती मुझको, तो जन्नत अधीन हो जाती !

Translate »