वो अपने ही होते हैं जो लफ्ज़ों से मार देते हैं !

अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,, मैंने औरों से सुना है के परेशान हूँ मैं...!!

बेवफ़ाओं के तो बन जाते हैं हज़ारों महबूब, निभाने वालों का कब कौन यहाँ होता है

तुम्हारा एकांत ही तुम्हें मनुष्य बना सकता है, भीड़ तुम्हें भेड़ बना देगी

अहमियत देने पर लोग इतराते बहुत है...

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