कैसे करूँ मैं खुद को तेरे काबिल ऐ जिन्दगी , हम आदतें बदलते हैं, तो तू शर्तें बदल लेती है ..!!

हम जो आपसे मिले है इत्तेफाक थोड़ी है, मिल कर तुमको छोड़ दे मज़ाक थोड़ी है।

हमें गुमान था तुम्हारा होने का आँखें खुली और सारा भ्रम टूट गया

जिम्मेदारियों के मशवरे मुझे न दो मैंने भरी जवानी में ख्वाहिशें जला डाली हैं!

दूनियां में सिर्फ मोबाइल ही जानता है, के उसके मालिक का किरदार कैसा है..

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