जिसके दिल में जगह ढूंढते रहे,उसने ही दिखाया कुआं था,मेरी वफा बेवजह हो रही है,इसका एहसास बाद में हुआ था..
टूटते पुल, धंसती सड़कें,टपकती छतें, बेपटरी ट्रेनें, बंद नाले, डूबते बेसमेंटझकझोर रहे हैं सबअब तो जागो कम से कमजनता हो तुम जागीर नहींकिसी रजवाड़े कीवोट जो देते रहोगेभ्रष्ट, निर्लज्ज, अक्षम प्रतिनिधियों कोधर्म और जाति के नाम परमरते रहोगे यूंही सब...
चुपके से भेजा था गुलाब उसे...खुशबु ने पूरे मोहल्ले मे शोर मचा दिया...
ख़ुद से बेहतर नहीं है कोई भी हमसफ़रअकेले रहना इस्तेमाल होने से बेहतर है !
इंसान पैसे से नहीं दिल से अमीर होना चाहिएपैसे का क्या है, आज है कल नहीं !