ये झूठ की बुनियाद पर टिकी मोहब्बत,
ये सब्र के बांध पर ठहरी मोहब्बत,
ये समाज के पाटों में पिसती मोहब्बत,
ये अंधी, गूंगी, बहरी मोहब्बत…..
ये मोहब्बत मिल भी जाये तो क्या है ?